इंफाल: मणिपुर में एक बार फिर हिंसा और तनाव ने सिर उठा लिया है। नोनी जिले में सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान अचानक हुई गोलीबारी में नागा विलेज गार्ड के एक सदस्य की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य वॉलंटियर घायल हो गए। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के दो जवान भी घायल हुए हैं। घटना के बाद इलाके में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं और कई राष्ट्रीय परियोजनाओं को रोकने का ऐलान किया गया है।
सुरक्षा अभियान के दौरान शुरू हुई गोलीबारी
अधिकारियों के मुताबिक यह घटना नागा बहुल नोनी जिले के बिटियांग गांव में हुई। सुरक्षा बल इलाके में अभियान चला रहे थे, तभी हथियारबंद गांव के वॉलंटियर्स की ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें एक वॉलंटियर की जान चली गई और तीन अन्य घायल हो गए। गोलीबारी के दौरान सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के दो जवान भी छर्रे लगने से घायल हुए, जिन्हें उपचार के लिए भेजा गया।
कौन होते हैं गांव के वॉलंटियर्स?
मणिपुर में विभिन्न समुदायों के गांवों में स्थानीय वॉलंटियर्स हथियारों के साथ अपने इलाकों की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। मई 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद राज्य के कई संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे स्वयंसेवी समूह सक्रिय हुए थे, जिनका उद्देश्य अपने गांवों को हमलों से बचाना है।
घटना के बाद भड़का विरोध, सुरक्षा अभियान पर उठे सवाल
मुठभेड़ के बाद स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों ने गांवों और आसपास के क्षेत्रों में चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सुरक्षा बलों के अभियान पर आपत्ति जताई।
राष्ट्रीय परियोजनाएं रोकने का ऐलान
जेटीसी-मणिपुर (इनपुई, लियांगमाई, रोंगमेई और जेमे) की वर्किंग कमिटी ने घोषणा की है कि चारों नागा समुदायों के क्षेत्रों से गुजरने वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे परियोजनाएं और अन्य राष्ट्रीय परियोजनाएं तत्काल प्रभाव से रोक दी जाएंगी।
संगठन ने रखीं कई मांगें
कमिटी ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला 13 मई को छह नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या तथा बिटियांग गांव में नागा वॉलंटियर समूहों पर कथित हमले के विरोध में लिया गया है। संगठन ने हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी, नागा गांवों में सुरक्षा अभियान रोकने और पूरे मामले में न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
